
दैनिक जागरण (Dainik Jagran)
verifiedफिर जलाई जाने लगी पराली, थोड़े मुनाफे के लिए किसान छीन रहे मिट्टी का ज
उत्तर भारत के कई हिस्सों में धान की कटाई शुरू हो चुकी है। वहीं फसल की कटाई के साथ पराली जलाए जाने के मामले भी सामने आने लगे हैं। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की ओर से सेटेलाइट के जरिए 28 सितंबर को उत्तर भारत में लगभग 237 पराली जलाने के मामले दर्ज किए गए। पराली जलाना किसानों के लिए समय और लागत बचाने का आसान विकल्प जरूर बन गया है, लेकिन इसका खामियाजा किसानों को लम्बे समय तक उठाना पड़ सकता है। हाल ही में हुए एक अध्ययन में सामने आया है कि फसलों के अवशेष जलाने से न सिर्फ मिट्टी के पोषक तत्व और सूक्ष्मजीव नष्ट होते हैं, बल्कि खेती के लिए जरूरी जैव विविधता और इकोसिस्टम को भी काफी नुकसान पहुंचता है। आग लगाए जाने से एक तरफ जहां मिट्टी में मौजूद पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं वहीं फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों पर लगाम लगाने वाले जीव भी खत्म हो जाते हैं। ऐसे में फसलों को काफी नुकसान पहुंचता है। लाभकारी जीवों की कमी से दीर्घकालिक उत्पादकता खतरे में पड़ रही है।