ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को रोकने के लिए किए गए वैश्विक प्रयासों से अंटार्कटिका में ओजोन परत में हुए छेद भरने लगे हैं। एमआईटी के नेतृत्व में हुए वैश्विक अध्ययन में सामने आया कि अंटार्कटिक ओजोन परत धीरे-धीरे ठीक हो रही है, वहीं दूसरी तरफ जमीनी स्तर पर ओजोन गैस का प्रदूषण नई चुनौती बनकर उभर रहा है। वैज्ञानिक चेतावनी दे रहे हैं कि यह ‘अदृश्य गैस’ न सिर्फ हमारी सांसों में जहर घोल रही है, बल्कि आने वाले समय में खाद्यान्न उत्पादन पर भी गहरा संकट खड़ा कर सकती है। जलवायु परिवर्तन के चलते बढ़ती गर्मी और प्रदूषण के चलते देश के कई बड़े शहरों में जमीनी स्तर पर ओजोन का प्रदूषण तेजी से बढ़ता दिख रहा है। शहरों में वाहनों, उद्योगों और अन्य स्रोतों से निकलने वाले प्रदूषक तत्वों ने ओजोन को एक नए सार्वजनिक स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा संकट में बदल दिया है। वैज्ञानिकों की चेतावनी है कि यदि इसे नियंत्रित नहीं किया गया, तो ओजोन प्रदूषण इंसानों की सेहत के साथ-साथ गेहूं, धान और मक्के जैसी प्रमुख फसलों की पैदावार को भी गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।